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विचार एवं आलेख (Articles & Research) • अक्टूबर 26, 2026 • 4 min read • Ramdeo Vishwabandhu

समता का संकल्प: जेपी आंदोलन की विरासत से अंबेडकर सामाजिक संस्थान तक

1998 में गिरिडीह में स्थापित अंबेडकर सामाजिक संस्थान जेपी आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए झारखंड में दलित-आदिवासी अधिकारों और समतामूलक समाज के लिए कार्य कर रही है।
Commitment to Equality: From the Heritage of the JP Movement to Ambedkar Social Institute

झारखंड का सामाजिक इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। यहाँ जाति और वर्ग की दीवारें केवल विचार में नहीं, रोज़मर्रा के जीवन में खड़ी रही हैं। इन्हीं दीवारों को गिराने के संकल्प से वर्ष 1998 में गिरिडीह में अंबेडकर सामाजिक संस्थान (ASI) की स्थापना हुई।

विरासत जो दिशा देती है
1970 के दशक का जेपी आंदोलन, जिसे संपूर्ण क्रांति कहा गया, केवल राजनीतिक परिवर्तन की माँग नहीं था। वह समाज के भीतर बदलाव का आह्वान था। ASI इसी वैचारिक धरोहर को आगे बढ़ाती है। संस्था के सचिव श्री रामदेव विश्वबंधु छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। उसी अनुभव ने उन्हें झारखंड में दलित और आदिवासी अधिकारों के प्रश्न को हाशिये से उठाकर मुख्यधारा की चर्चा तक लाने की प्रेरणा दी।

दृष्टि: स्थिति और अवसर में समानता
ASI का विज़न एक समतामूलक समाज है, जहाँ वंचित वर्गों को केवल अवसर का वादा नहीं, बल्कि स्थिति और अवसर, दोनों में समानता मिले। यह भेद महत्त्वपूर्ण है। जब तक किसी समुदाय की सामाजिक स्थिति कमज़ोर रहती है, तब तक खुले अवसर भी उसकी पहुँच से दूर रहते हैं।

सहानुभूति नहीं, सशक्तिकरण
संस्था की कार्यशैली की पहचान यह है कि वह दया के भाव से नहीं, सूचना, शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के भरोसे चलती है। उसकी समझ सीधी है: जो व्यक्ति अपने अधिकार जानता है, वह अपने निर्णय स्वयं ले सकता है। सशक्तिकरण का अर्थ किसी को सहारा देना नहीं, उसे अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाना है।

समापन
सामाजिक भेदभाव एक दिन में नहीं मिटता। उसके लिए विचार की स्पष्टता, कर्म की निरंतरता और समुदाय के साथ भरोसे का रिश्ता चाहिए। ASI की यात्रा इसी धैर्यपूर्ण साधना का उदाहरण है।

Published by Ambedkar Social Institute (Trust Reg. 5488/IV 36/98)

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